महाराष्ट्र कामगार आंदोलनाची सुरवात भारतीय स्वातंत्र्य संग्रामापासून झाली होती. स्वातंत्र्य संग्रामाच्या काळात भारतात संघटित श्रमिक प्रश्नांचे संगणक झाले व श्रमिकांना उन्नतीचे हक्क मिळवायचे असे उद्देश ठेवले गेले होते.
इंग्रजी शासनकाळात, भारतात श्रमिकांचे हक्क संरक्षण न केल्याने, श्रमिकांचा दु:ख वाढत होता. 1885 मध्ये, मुंबईमधील कामगारांनी एक संघ तयार केला आणि यांच्याशी संपर्क साधल्याने इंग्रजी शासनकालातील श्रमिकांना उन्नती देण्याचे विचार पडले.
स्वातंत्र्य संग्रामानंतर, 1948 मध्ये महाराष्ट्र सरकार जाहीर झालेल्या "मजदूर आयुक्त अधिनियम" मध्ये श्रमिकांचे हक्क संरक्षित करण्याचा प्रयत्न केला आणि त्यानंतर श्रम विभाग स्थापित केला.
या दरम्यान, महाराष्ट्रातील कामगार आंदोलन वाढत गेले, जे अक्टूबर 1948 मध्ये स्थापित झालेल्या महाराष्ट्र राज्य कामगार संघाच्या संगटनांच्या माध्यमातून शक्य झाले
महाराष्ट्र कामगार दिवस हर साल 1 माई को साजरा किया जाता है। यह दिन महाराष्ट्र राज्य में बैंक, सरकारी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान आदि सभी जगहों पर छुट्टी के रूप में मनाया जाता है।
इस दिवस के मौके पर, अनेक श्रमिक संगठन और राज्य सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में कई श्रमिक संगठन और अन्य संगठनों द्वारा सेमिनार, रैली, और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस दिवस को समर्पित कुछ कार्यक्रमों में श्रमिकों के अधिकारों, उनके लाभों और सुरक्षा के बारे में चर्चा की जाती है। इससे समाज में श्रमिकों के महत्व को समझाने का भी महत्वपूर्ण रोल होता है।
महाराष्ट्र कामगार दिवस के अवसर पर, कुछ अधिकारिक दौर्जनों द्वारा संबोधन किया जाता है जिसमें कामगारों व श्रमिकों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाता है। इस दिन कामगारों को विभिन्न छुट्टियों व विशेष रूप से आयोजित किए गए कार्यक्रमों के लिए अवकाश दिया जाता है।
कामगारों को उनके अधिकारों को संरक्षित करने के लिए, महाराष्ट्र सरकार ने विभिन्न कानून बनाए हैं। इनमें से कुछ मुख्य हैं - मजदूर आयुक्त अधिनियम 1958, वेतन उपलब्धि अधिनियम 1936, जीवन बीमा अधिनियम 1963, वर्कमेन्स कम्पेंसेशन अधिनियम 1923, श्रम अधिनियम 1979 आदि।
इस दिन को आदर्श श्रमिक बनाने के लिए, कामगारों को अपने हकों को जानना चाहिए और उन्हें अपने अधिक

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